एम-आरएनए आधारित कोविड टीकों के निर्माण को संभव बनाने वाले वाले वैज्ञानिकों को वर्ष-2023 का नोबेल पुरस्‍कार संयुक्त रूप से मिलेगा

चिकित्‍सा या शरीर विज्ञान क्षेत्र में वर्ष-2023 का नोबेल पुरस्‍कार संयुक्‍त रूप से हंगरी मूल की अमरीकी प्रोफेसर कातलिन कारिको और अमरीका के प्रोफेसर ड्रीयू वाइजमैन को प्रदान किया जाएगा। इन दोनों वैज्ञानिकों ने ऐसी प्रौद्योगिकी विकसित की जिससे एम-आरएनए आधारित कोविड टीकों का निर्माण संभव हो सका। इस तकनीक पर वैश्विक महामारी से पहले प्रयोग चल रहा था लेकिन अब यह विश्‍व में लाखों लोगों को दी जा चुकी है। इसी एम-आरएनए प्रौद्योगिकी पर कैंसर सहित अन्‍य बीमारियों के लिए भी अनुसंधान हो रहा है।

प्रोफेसर कारिको और प्रोफेसर वाइजमैन काफी लंबे समय से यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिलवेनिया में काम कर रहे हैं। इन दोनों को अपने अनुसंधान के लिए 2021 में प्रतिष्ठित लास्‍कर पुरस्‍कार सहित कई पुरस्‍कारों से सम्‍मानित किया जा चुका है।नोबेल पुरस्‍कार समिति ने कहा है कि आधुनिक समय में मानव स्‍वास्‍थ्‍य के लिए दोनों वैज्ञानिकों का योगदान काफी महत्‍वपूर्ण है। इनकी तकनीक से मानव स्‍वास्‍थ्‍य के लिए एक सबसे बडे खतरे के समय में अभूतपूर्व दर से टीकों का विकास हो पाया।

ये टीके वायरस या बैक्टिरिया से लडने के लिए शरीर के प्रतिरोधक तंत्र को तैयार करते हैं। एम-आरएनए तकनीक पारंपरिक टीकों से अलग है। जब हमारे शरीर पर कोई वायरस या बैक्टिरिया हमला करता है तो ये तकनीक उस वायरस से लडने के लिए हमारी कोशिकाओं को प्रोटीन बनाने का संदेश भेजती है। इससे हमारे प्रतिरोधक तंत्र को जो जरूरी प्रोटीन चाहिए वो मिल जाता है। कोविड महामारी के दौरान माडर्ना, फाइजर तथा बायोएनटेक टीके एम-आरएनए तकनीक पर आधारित थे। 

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