विदेश मंत्री डॉ. सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने कहा है कि जब भी बात दक्षिण-दक्षिण सहयोग की आई है तो भारत उस पर खरा उतरा है। न्यूयॉर्क में इंडिया-यूएन फॉर ग्लोबल साउथ कार्यक्रम में डॉ. जयशंकर ने कहा कि पूर्व और पश्चिम के मतभेदों तथा उत्तर और दक्षिण की भारी असमानताओं के कारण जी-20 की भारत की अध्यक्षता बहुत चुनौतीपूर्ण थी। उन्होंने कहा कि भारत ने अपनी अध्यक्षता के तहत जी-20 को ग्लोबल साउथ के कल्याण की दिशा दिखाई और अफ्रीकी संघ को जी-20 में शामिल किया जाना इसका प्रमाण है। विदेश मंत्री ने कहा कि विकास से जुडी चुनौतियों का सामना किस प्रकार से करना है, इसके लिए भारत अन्य देशों की प्रेरणा बना रहेगा। डॉ. जयशंकर ने कहा कि यह स्पष्ट होता जा रहा है कि भू-राजनीतिक कारणों का असर देशों की भोजन और ऊर्जा जैसी बुनियादी आवश्यकताओं पर पड़ रहा है।
डॉ. जयशंकर संयुक्त राष्ट्र महासभा के 78वें सत्र में भाग लेने के लिए न्यूयॉर्क में हैं। वे मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च स्तरीय सत्र को संबोंधित करेंगे।