राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि भारत की समृद्ध कृषि-जैव विविधता वैश्विक समुदाय के लिए एक खजाना है। आज नई दिल्ली में किसानों के अधिकारों पर पहली वैश्विक संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि भारत एक विशाल विविधता वाला देश है, जिसका क्षेत्रफल दुनिया का केवल 2.4 प्रतिशत है, लेकिन पौधों और जानवरों की सभी दर्ज प्रजातियों का 7 से 8 प्रतिशत हिस्सा यहीं है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि भारत पौधों और प्रजातियों की विस्तृत श्रृंखला से संपन्न देशों में से है। उन्होंने कहा कि देश के किसानों ने कड़ी मेहनत की है और पौधों की स्थानीय किस्मों का संरक्षण तथा पारंपरिक किस्मों का पोषण किया है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि कृषि अनुसंधान और प्रौद्योगिकी विकास ने भारत को 1950-51 के बाद से खाद्यान्न, बागवानी, मत्स्य पालन, दूध और अंडे के उत्पादन को कई गुना बढ़ाने में सक्षम बनाया है, जिससे राष्ट्रीय खाद्य और पोषण सुरक्षा पर स्पष्ट प्रभाव पड़ा है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि कृषि-जैव विविधता संरक्षकों तथा मेहनती किसानों, वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं के प्रयासों ने सरकार के सहयोग से देश में कई कृषि क्रांतियों को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
राष्ट्रपति ने कहा कि किसानों के अधिकारों की रक्षा करना और उनके भविष्य की चिंता करना हमारी जिम्मेदारी है, क्योंकि वे मानवता के अन्नदाता हैं।