विदेश मंत्री डॉ. सुब्रमण्यम जयशंकर ने कहा है कि वैश्वीकरण के मौजूदा स्वरूप में सुधार ज़रूरी है। वाशिंगटन डीसी में हडसन इंस्टीट्यूट में भारत और नई प्रशान्त व्यवस्था पर डॉ. जयशंकर ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में विकसित वैश्वीकरण के मॉडल में कई जोखिम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि हिन्द-प्रशान्त के प्रमुख मुद्दों में विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण और विश्वास तथा पारदर्शिता को बढ़ावा देना शामिल है। डॉ0 जयशंकर ने कहा कि पिछले छह वर्षों में क्वाड की अवधारणा को बल मिला है। उन्होंने कहा कि भारत पश्चिम विरोधी नहीं है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया काफी हद तक पश्चिमी देशों पर आधारित है और भारत उन बदलावों को प्रोत्साहित करना चाहता है, जिनकी अत्यधिक आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र सहित वैश्विक संस्थानों को अधिक प्रासंगिक बनाने का प्रयास कर रहा है। डॉ. जयशंकर ने कहा कि सबसे अधिक आबादी और दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश भारत के सुरक्षा परिषद का सदस्य न होने से इस संगठन की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता में अभाव महसूस होता है।
neww | September 29, 2023 8:39 PM | संशो. जयशंकर वैश्वीकरण
वैश्वीकरण के मौजूदा स्वरूप में सुधार ज़रूरी है- विदेश मंत्री डॉ. सुब्रमण्यम जयशंकर
